सोमवार, 25 जनवरी 2021

Akbar Birbal story sone ka khet in Hindi

Akbar Birbal sone ka khet

Akbar Birbal sone ka khet-

एक दिन अकबर के हरम में एक सेवक साफ सफाई कर रहा  था। साफ सफाई करते हुआ उससे अकबर का प्रिये फूलदान गिर जाता है। 


वह बहुत ज्यादा ड़र जाता है। क्युकी वह जनता है शहंशाह को यह फूलदान दिल से भी ज्यादा पसंद है। 


वह सजा से बचने के लिए फूलदान के टुकड़ो को छुपा देता है। 


अकबर अपने कमरे में आते है फूलदान नहीं पा के वह सैनिक को बुलाते है। पूछते है हमारा हमारा फूलदान कहाँ पर है। सैनिक कहता है पता नहीं हज़ूर ,में सेवक को बुला कर लाता हु। 


अकबर - हमारा फूलदान कहाँ पर है बताओ। 


सेवक - हज़ूर में उसे साफ करने ले गया था। 


अकबर - तुम उसको यहां  भी साफ कर सकते थे फिर उसे अपने घर क्यों ले गए। 

जाओ उसे वापिस लाओ। 


सेवक - हज़ूर वह साफ सफाई करते समय टूट गया। 


अकबर - अभी तो तुम कह रहे  थे घर ले गए। गलती से टूट जाता तो हम तुम्हे माफ़ कर देते। परन्तु  तुमने झूठ  बोला है। जाओ हमारी सल्तनत से दफा हो जाओ। 


अकबर यह किस्सा दरबार में सुनाते है। अकबर पूछते है क्या किसी ने कभी झूठ बोलै है। सब जवाब देते है नहीं। 


बीरबल बोलते है जनाब हम सभी को कभी न कभी झूठ बोलना पड़ता है। किसी दुःख  ना हो तो झूठ बोलने में कोई हर्ज़ नहीं होता। 


अकबर - हम यह क़तई बर्दास्त नहीं कर सकते हमारे सल्तनत का मंत्री झूठा हो। हम यह बर्दास्त नहीं कर सकते हमारा मंत्री एक झूठा है। बीरबल आज से तुम हमारे मंत्री नहीं हो। 


अकबर यह कह कर बीरबल को राज्ये  से बहार कर  देते है। 


बीरबल को  दिल पे लग जाती है।  वह सोच विचार करते है। तब उन्हें एक सुझाव आता है। 


वह सुनार के पास जाते है और उससे एक गैहू की डाल बनाने को कहते है। 


कुछ दिनों बाद। ... 


बीरबल दरबार में जाते है। अकबर बीरबल को देख कर काफी क्रोधित हो जाते है। कहते है हमने तुम्हे यहां आने से मना किया था पर फिर भी तुम यह  गए। 


बीरबल- हज़ूर में मानता हु। परन्तु राज्य की भलाई की बात होगी तो मुझे आना ही पड़गा। मुझे एक ऐसी चीज़ मिली है। जो सल्तनत को काफी आमिर बना देगी। 


बीरबल फिर अकबर को सोने की डाल दीखते है। बीरबल बताते है मेरे गुरु ने कहाँ है ,अगर हम इस सोने की डाल को किसी खेत में बोते है तो ,वह सोने का खेत बन ज्यागा। 

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अकबर - क्या तुम्हे यकीन है। 


बीरबल - हज़ूर यह कोई आम ज्योतिषी नहीं है। मुझे यह डाल दे कर वह तालाब के ऊपर से चल कर  दूसरी तरफ चले गए। 


अकबर - कल सवेरे उपजाऊ ज़मीन देख कर इससे बोते है। 


ऐसा कह कर अकबर अपने महल की तरफ चले जाते है। 


अगली सुबह अकबर बीरबल और सभी नगर वासी खेत पर पहुंचते है। 


अकबर - जाओ बीरबल बोअ दो सोने की डाल  को। 


बीरबल - नहीं हज़ूर में नहीं कर सकता। इस डाली को वही बो सकता है जिसने कभी झूठ नहीं बोलै हो।  आप तो जानते है में कई बार झूठ बोल चूका हु। 


अकबर- सभी नगर वासिओ  कहते है , आप मेसे कोई आगे आये और इस बाली को बोये। 


सभी मुँह निचे कर के खड़े हो जाते है। 


बीरबल - मुझे लगता है आप ही इसकी बुआई कर सकते है। 


अकबर इधर उधर देखने लग जाते है। 


बीरबल कहते है जनाब  में झूठ बोल रहा था। यह सोने की बाली जादुई नहीं है। यह मेने एक जोहरी से बनवायी थी। 


आप समझ गए होँगे हर किसी को कभी न कभी झूठ बोलना पड़ जाता है। 


अकबर कहते है हम समझ गए बीरबल। 


अकबर बीरबल से माफ़ी मांगते है।  कहते है तुमने सचाई बोली फिर भी हमने तुम्हे सजा दी। 


अकबर उस सेवक को भी वापिस राज्ये में बुलवा लेते है। 

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सोमवार, 18 जनवरी 2021

Kathal ka fal: Akbar Birbal Ki kahaniya

kathal ka fal

कटहल का फल -

 राजा बीरबल को प्रकृति से बहुत प्रेम था वह अपना अधिक समय बाग़ बगीचों में बिताते थे। उनकी सबसे मनपसंद जगह महाराज अकबर का बगीचा था। 

इस बगीचा की देख रेख एक बिनोद नामक माली करता था। वह शांत सवभाव का आदमी था। वह सीधी जिंदगी जीता था। उसे अपने बगीचों से प्रेम था। 

बीरबल और बिनोद अक्सर बाग़ के पेड़ ,पोधो और फूलो की बातें किया करते थे। राजा बीरबल उसके साथ बहुत अच्छा व्यव्हार करते थे। माली भी बीरबल की बहुत इज़्ज़त करता था। 

एक दिन बीरबल बगीचे में घूम रहे थे। उन्हें किसी की रोने की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने वहा जा के देखा तो बिनोद रो रहा था। 

उन्होंने बिनोद से रोने का कारण पूछा। बिनोद पहले मना करने लगा फिर सबकुछ बता दिया। 

माली कहता है में पिछले १५ वर्ष से अपने बुढ़ापे के लिए बचत कर रहा था। मेने अपनी सारी बचत कटहल के फल के निचे दबा के रखे थे। परन्तु आज वहां से मेरे सारे पैसे चोरी हो गए। 

बीरबल कहते है तुमने यहाँ पैसे छुपा के क्यों रखे। माली कहता है जनाब मेने सोचा पेड़ के निचे कौन पैसे देखेगा इसी वजह से मेने छुपा दिए। 

में अपना पूरा समय यही बिताता हु इस वजह से मेरी पूरी नज़र यही रहती थी। बीरबल कहते है। अगर ऐसा है जिसे तुमने बतया था वही चोर होगा। तुमने किसको इसके बारे में बताया था। 

माली- मेने किसी को भी नहीं बताया था हज़ूर। 

बीरबल- फिर पक्का तुम्हे किसी ने यहां पैसे दबाते देखा होगा। 

बिनोद - यहाँ पर तो किसी का भी आना मना है सिवाय आपके ,शहंशाह अकबर और कुछ मंत्री के आलावा। 

बीरबल - तुम चिंता मत करो। मुझ पर विश्वास करो में तुम्हारे पैसे ढूढ़ निकलूंगा। अब घर जाओ और आराम करो। 

बीरबल अपने घर में मंथन करते है। विचार करते समय उन्हें एक बात सुझाती है कटहल के फल के पेड़ के पास कोई क्यों खोदेगा। तभी उन्हें विचार आता है कोई वेद या हाकिम ही खोद सकता है जड़ी बूटी की खोज में। 

अगले दिन बीरबल दरबार में अकबर के सामने सब कथा सुनाते है। बीरबल अकबर से आज्ञा मानते है मंत्री से कुछ जवाब के लिए। 

बीरबल - आप लोगो में से हाल ही में कोई बीमार हुआ है। 

एक मंत्री - हां। पिछले कुछ दिनों से मुझे गले में दिकत है में एक आयुर्वेदिक दवा का सेवन कर रहा हु। 

बीरबल - आप जड़ी बूटी कहा से लाये थे। 

मंत्री - यह जड़ी बूटी मेरी बीवी की माँ ने भेजी थी। 

दूसरा मंत्री - बीरबल जी मुझे कब्ज की शिकायत है ,मेरे हाकिम जी ने मुझे एक दवा दी थी। में उसका सेवन कर रहा हु। पर उस दवा का कोई असर नहीं है। पेट अभी भी गंदगी से भरा हुआ है। आपके पास इलाज है तो बता दे मुझे। 

बीरबल - मेरे पास इलाज तो नहीं है। पर क्या आप उन वेद को दरबार में बुला सकते है। 

दूसरा मंत्री - जी है ,उनका नाम मनोज डे है। 

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अकबर मनोज डे को दरबार में बुलाने की आज्ञा देते है। 

बीरबल - वैद्य जी में बहुत दिनों से परेशान हु बहुत दिनों से मुझे कब्ज की शिकायत है। आप मुझे कोई दवा दे ताकि मेरा पेट सांत हो। 

मनोज डेय - जी चिंता ना करे में अपनी दवाई में कटहल का फल इस्तमाल करता हु। उसके सेवन से आपकी लैटरिंग सब बहार आ जायगी और आपका पेट भी आराम में रहेगा। 

बीरबल - वेध जी पर कटहल का पेड़ हमे कहाँ पर मिलेगा। 

मनोज डेय - जनाब एक कटहल के फल का पेड़ शहंशाह के बगीचे में है। 

बीरबल-   वेध जी में आपको एक मौका दूंगा। बिनोद के पैसे लोटा दे। 

वेध - जनाब मुझे माफ़ करना में उसके पैसे वापिस कर दूंगा। 

बीरबल - अकबर से विनती करते है। मनोज डेय को माफ़  कर दो उसकी सचाई के लिए। 

बीरबल मनोज डेय से पैसा ले कर बिनोद को वापिस कर देते है। 

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गुरुवार, 14 जनवरी 2021

निकम्मा काज़ी : बीरबल की बुद्धिमानी

निकम्मा काज़ी बीरबल की बुद्धिमानी

निकम्मा  काज़ी -

कहानी का आगाज़ होता है शहंशाह अकबर से ,वह अपने दरबार में बैठे हुए थे। 

एक किसान उनसे मिलने के लिए आता है। 

अकबर - बोलिये आपको मुझ से क्या काम है। 

किसान- जहाँपना मेरा नाम शाहरुख़ है में एक किसान हु। में थोड़े से पैसे कमा कर अच्छी खासी जिंदगी जी रहा था। ६ महीने पहले तक मेरी जिंदगी बहुत अच्छी खासी निकल रही थी। 

एक दिन मेरी बीवी की मिर्त्यु हो गयी। बीवी के चल बसने के बाद में अकेला महसूस करने लगा। मेरी कोई औलाद भी नहीं है। 

इसी वजह से में ज्यादा डिप्रेशन में आ गया था। 

एक दिन मुझे काजी सलमान मिले। उन्होंने मुझ से पूछा तुम दुखी क्यों हो। मैने उनको सब कुछ बता दिया ,

तब उन्होंने मुझे कश्मीर में जाने की सलाह दी थी। में उनकी सलाह के अनुसार कश्मीर में कुछ दिन के लिए चला गया। 

परन्तु जाने से पहले मैने अपनी जिंदगी भर की कमाई काजी सलमान को दे गया था। मेरे थैले को कोई नहीं खोले इस लिए मैने थैले के ऊपर सील लगा दी थी। 

जब में कश्मीर से वापिस लौटा उसके बाद में काजी के पास अपना धन लेने चला गया। काजी ने मुझे थैला वापिस कर दिया। 

वापिस करते हुए उन्होंने थैले पर लगी सील जांचने को भी कहा। सील सही थी। 

में अपने पैसे वापिस ले कर घर आया। जब मैने थैला खोला तो उसमे सोने के सिक्के की जगह पथर के टुकड़े मिले। 

में उनके पास दुबारा गया और सारी कथा सुनाई। परन्तु उन्होंने मुझे मेरे धन देने के बजाए। मुझे गिरफ्तार करवाने की धमकी दे कर वापिस भेज दिया। 

शाहरुख़ कहता है आपके पास में आखिरी आस ले के आया हु हज़ूर। आप ही मुझे मेरा धन वापिस दिलवा सकते है। 

अकबर बीरबल को यह पहेली सुलझाने को कहते है। 

बीरबल किसान से पूछता है। आपके पास वह थैला अभी मजूद है। शाहरुख़ उन्हें थैला दे देता है। 

बीरबल अकबर से कुछ दिनों की मोहलत मांगते है सचाई को खोजने के लिए। 

अकबर उन्हें समय दे देते है। 

बीरबल काफी सोच विचार करते है। उसके बाद वह अपनी एक पोशाक को फाड् देते है। 

बीरबल अपने सेवक को बुला कर कहते है। पुरे शहर खोजो पर मुझे एक ऐसा दर्जी चाहिए। जो मेरी पोशाक सिले दे और पोशाक में सिलाई दिखयी भी नहीं दे। 

सेवक कुछ समय बाद पोशाक ले कर आता है। बीरबल पोशाक की सिलाई देख कर हैरान रह जाते है , वह उस दर्जी का नाम और पता पूछते है। 

सेवक उसका नाम अजय और वह नगर के बीचो बीच रहता है। 

बीरबल उस दर्जी को अपने घर बुलवाते है। 

अगले दिन...

अकबर बीरबल से पूछते है।  आपने  सचाई का पता लगवा लिया है या अभी और समय चाहिए आपको। 

बीरबल उत्तर देते है।  जनाब आप उन दोनों को बुलवा लीजिये में सचाई उनके सामने साबित कर दूंगा। 

अकबर दोनों को हाज़िर होने का हुकुम देते है। 

अकबर किसान से पूछते है ,यह वही थैला है जो तुमने इस काजी सलमान के पास रखवाया था। 

शाहरुख़ उत्तर देता है जी  हां हज़ूर। 

बीरबल काजी से पूछते है। यह वही थैला है। 

सलमान उत्तर देता है जी हा हज़ूर , पर मैने यह थैला खोला नहीं। इस थैले में मोहर वैसी की वैसी थी हज़ूर। 

बीरबल अजय दर्जी को दरबार में बुलवाते है। 

बीरबल अजय से पूछते है आपने  काजी साहब का हाल ही में कोई काम किया है। 

दर्जी बताता है जी हज़ूर, मैंने  इनका एक पैसे से भरा थैला सीला था। 

बीरबल कहते है हज़ूर यह एक निकम्मा  काज़ी है। इसने शाहरुख़ के पैसे खाये है आपको इसको कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए। 

अकबर निकम्मा काज़ी को उम्र भर जेल में रहने की सजा सुनते है। 

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रविवार, 10 जनवरी 2021

chitrakar ki vyatha : Akbar birbal ki kahaniya

चित्रकार की व्यथा

चित्रकार की व्यथा -

शहंशाह अकबर बहुत गुस्से वाले थे। छोटी छोटी बातो पर वह दुसरो को सजा दे देते थे। बीरबल यह बात जानते थे। वह कुछ ना कुछ तरकीब लगा कर शहंशाह का गुस्सा शांत कर देते थे। 

एक दिन शहंशाह अकबर अपने कमरे में बैठ कर कुछ विचार कर रहे थे। तभी वह सिपाही को बुलाते है और पूछते है। 

अकबर -सिपाही हमारे कमरे का रंग हरा किसने चुना।
सिपाही - डरते हुए जवाब देता है। जनाब आपने ही चुना था। 
अकबर - हम ऐसा रंग चुन ही नहीं सकते।  जाओ जिसने भी इस कमरे को रंगा है उसे हमारे सामने प्रस्तुत करो। 

सिपाही चित्रकार को ले के आता है। 

अकबर - ओह आ गए तुम। 

चित्रकार - मुझ से क्या गलती हुई जहाँपना। 

अकबर - तुम्हे नहीं पता तुमने क्या गलती की।  यह देखो दीवारे इस दीवार का रंग हमे बिलकुल पसंद नहीं आया। 

चित्रकार - हज़ूर में पूरी रात काम कर के इस कमरे का रंग बदल दूंगा। 

अकबर - जाओ अपने सभी रंग ले के आओ हमे जो पसंद आयंगे। इस बार वही रंग दिवार पर होने चाहिए। नहीं तो तुम्हे वह सारे रंग पिने होँगे। 

चित्रकार  अपने सभी रंग अकबर को ला कर दीखता है। अकबर उनमे से एक रंग का चुनाव करते है। रंगरेज पूरी रात मेहनत कर के पुरे कमरे में रंग करता है। 

अगली सुबह अकबर अपने कमरे में आते है। अपने कमरे का रंग देख कर अकबर बहुत जयदा गुस्सा होते है। वह तुरंत सिपाही को रंगरेज को बुलाने का आदेश देते है। 

चित्रकार आता है।  अकबर उसको आदेश देता है।  जाओ अपने सभी रंग ले कर आओ। 


रंगरेज जल्दी जल्दी जाता है जाते हुए वह बीरबल से टकरा जाता है बीरबल उनसे जल्दी का कारण पूछते है। चित्रकार उन्हें सब कुछ बता देते है। 

बीरबल रंगरेज से कहते है। अगर अकबर ने कहाँ है तो वह पक्का तुमसे रंग पिलवायंगे। परन्तु में तुम्हे एक तरकीब बता रहा हु वह तुम अनुसरण करना। 

चित्राकर रंग के मटके ले कर अकबर तक जाते है। अकबर उन्हें आदेश देते है। इन सभी रंग को पि जाओ। 

चित्रकार सभी रंग को पी जाते है। अकबर उसे रोक देते है और कहते है अगली बार ध्यान देना। 

अकबर मन ही मन सोचते है। इतना रंग पिने के बाद यह २ दिन तक बीमार रहेगा। 

अगले दिन अकबर सोच में पड़ जाते है। चित्रकार अभी भी काम कर रहा था। 

अकबर चित्रकार को बोलते है और कहते है तुमने अभी तक अपना काम खत्म नहीं किया। जाओ अपने रंग दुबरा लाओ। 

रंगरेज बीरबल को ढूढ़ते है। उनसे फिर से मदद मांगते है। बीरबल उन्हें फिर एक तरकीब बता देते है। 

चित्रकार रंग के मटके ले आता है अकबर फिर दुबरा उसको रंग पिने को कहता है। चित्रकार रंग पिने लगता है। 

अकबर उसको रोक कर रंग के मटके के द्रवेय को जांचते है। उन्हें जाँच में पता चलता है यह रंग नहीं बल्कि शरबत  है। 

अकबर उससे पूछते है मेरे साथ फरेब। बताओ यह तरकीब तुम्हे किसने बताई। 

बीरबल आते है और कहते यह योजना मेने बतई थी हज़ूर। अकबर कहते है मुझे समझ जाना चाहिए था। 

अकबर कहते है तुम्हे कैसे पता चला में इसको कोनसे मटके का रंग पिने को कहूँगा। बीरबल कहते है हज़ूर मुझे नहीं पता था। मेने इसको सभी मटको में शरबत लाने कहाँ था। 

अकबर बीरबल को शाबाशी देते हुए कहते है। बीरबल जितना बुद्धिमान कोई नहीं। 

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गुरुवार, 7 जनवरी 2021

Birbal ki chaturai ki kahani- jadui gadha

बीरबल की चतुराई

birbal ki chaturai ki kahani

बीरबल की चतुराई की कहानी शुरू होती है , शहंशाह अकबर और महारानी के साथ। 

अकबर , महारानी को आभूषण तोफे में देते है।  महारानी बदले में अकबर से कहती है। यह आभूषण हमे बहुत पसंद आया। 

अगले दिन महारानी अपना सिंगार कर रही थी. सिंगार करते समय वह दराज में अपना आभूषण खोजती है। परन्तु उन्हें आभूषण नहीं मिलता। 

रानी बाहर  से एक नौकरानी को  बुलाती है और उसको हुकम देती है। हमारा आभूषण को खोजो। 

नौकरानी ,रानीसहिबा से कहती है। आज आप दूसरा आभूषण पहन लीजिये। 

रानी कहती है नहीं , यह आभूषण हमे शहंशाह ने तोफे में दिया है। हमे उसी आभूषण को पहनेगे। 

अकबर उसी समय आते है। रानी उन्हें सारी कथा बता देती है। अकबर रानी को समझते है आप चिंता ना करे। हम आपको दूसरा आभूषण ला कर दे देंगे और यह आभुषण भी ढूढ़ निकालेंगे। 

अकबर सैनिको को आदेश देते है। जाओ कमरे का कोना कोना छान डालो पर हमे वह आभूषण किसी भी कीमत पर चाहिए। 


सैनिक कुछ समय बाद आता है। वह बताता है जहाँपना हमने पूरा कमरा छान मारा परन्तु आभूषण कही पर भी नहीं मिला। लगता है वह हार चोरी हो गया है। 

अकबर इस बात से काफी सकते में आ जाते है। वह फ़ौरन बीरबल को बुलाने का आदेश देते है। 

बीरबल आते है , अकबर बीरबल को सारी कथा सुना देते है। बीरबल भी इस बात से सहमत थे की हार चोरी ही हुआ है। 

बीरबल फ़ौरन सभी दाशिओ और पहेरेदारो को एकत्रित करते है। बीरबल अकबर से कहते है ,आप इन् सभी को यही पर बैठा कर रखे।  में अभी अपने एक मित्र को बुला कर लाता हु। वह चोर को पकड़ने में मदद करेगा। 

बीरबल कुछ समय बाद आते है। उनके साथ एक गधा मौजूद था। 

अकबर बीरबल से कहते है यह गधा यहाँ पर क्या कर रहा है। 

बीरबल उत्तर देते है यह एक जादुई गधा है। यह चोर को पकड़ने में हमारी मदद करेगा। 

बीरबल उस गधे को एक कमरे में बंद कर आते है। बीरबल कहते है जैसे मैंने कहाँ यह एक जादुई गधा है। अब सभी एक एक कर के अंदर जाये और गधे की पूछ पकक्ड़ कर बोले मैंने हार नहीं चुराया। 

फिर मेरा मित्र बताएगा चोर कौन  है। सभी एक एक कर के अंदर जाते है और जादुई गधे की पूंछ पक्कड़ कर कहते है मैंने हार नहीं चुराया। 

फिर बीरबल सभी के हाथ एक एक कर के जांचते है। और फिर उनमे से एक दाशी को दोषी बताते है। 
अकबर कहते है आप इससे दोषी किश आधार पर साबित कर रहे है। 

बीरबल बताते है। जहाँपना मैंने गधे की पुंछ पर एक विसेस प्रकार का पानी लगाया था। उस पानी के अवसेस सभी के हाथ से मिले परन्तु इस दाशी के हाथ पर कोई निशान  नहीं थे। 
इसी आधार पर मैंने इसको दोषी ठहराया है। 

अकबर बीरबल की चतुराई से बहुत खुस  होते है और बोलते है बीरबल की चतुराई की कहानी में एक किस्सा और जुड गया वह है जादुई गधा। 

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सोमवार, 4 जनवरी 2021

अकबर बीरबल की कहानियाँ - मुर्ख लोगो की सूची

मुर्ख लोगो की सूची -

मुर्ख लोगो की सूची

एक दिन शहंशाह अकबर अपने दरबार  बैठे हुआ थे , अकबर सभी दरबारिओ को सम्भोदित करते हुए कहते है. 

अकबर - हम कितने खुश किस्मत है , जो हमे इतने बुद्धिमान लोग मिले, हम बुद्धिमान लोगो से मिल कर बहुत पक  चुके है , हमे अब मुर्ख लोगो से मिलना है। 

अकबर बीरबल से कहते है , आप बहुत चतुर है हम आपको यह चुनौती देते है, आप हमारी सल्तनत के 5 ऐसे लोगो का पता लगाए जिन्हे हम सबसे बड़ा पागल कह सके। 

बीरबल - आप ऐसा करना कहते है जहाँपना। 

अकबर - हा , हमे हमारी सल्तनत के 5 सबसे पागल व्यक्ति ढूढ़ कर ला कर दो.

 बीरबल - में उन्हें कल तक आपके सामने ला कर रख दूंगा हज़ूर। 

बीरबल पागल व्यक्ति की तलाश में निकल जाते है। उन्हें सामने से एक व्यक्ति गधे पर बैठ कर आते दीखता है.

बीरबल - रुको , मुझे तुम्हे जानने की इच्छा है। तुम कौन हो। 

व्यक्ति - जी मेरा नाम मनोज है। में एक धोबी हु। में अपने गधे के लिए कुछ चारा ले कर लोट रहा हु. 

बीरबल -  एक चीज़ बताओ।  बोझ  सर पर को ढ़ो रहे हो , तुम्हारे पास गधा है। 

धोबी - जी , मेने सोचा गधा इतना वजन सर पर कब तक ढोएगा। कुछ देर इसको आराम दे दू। 

 बीरबल - मन में सोचते हुए कहते है ,यह हे मेरा पहला पागल , खुद गधे पर बैठ कर ,उसका वजन काम कर रहा है. 

बीरबल - धोबी , तुम मेरे साथ महल चलो में तुम्हे इस काम के लिए इनाम दिलवाऊंगा। 

ऐसा कह कर दोनों महल की तरफ चल देते है। चलते चलते उन्हें रस्ते में दो व्यक्ति लड़ते हुआ दीखते है। 

बीरबल - तुम लोग कौन हो और को लड़ रहे होआ. 

पहला व्यक्ति - हज़ूर मेरा नाम विवेक है और ये निखिल है। निखिल मेरी गाय के ऊपर  शेर छोड़ने की बात कह रहा है. 

बीरबल- कहाँ  पर है शेर , कहाँ  पर है गाय 

दोनों कहते है हज़ूर , जैसे ही हमे वरदान मिलेंगे में गाय माँगूगा और ये शेर। 

दूसरा व्यक्ति - जैसे ही मुझे शेर मिलेगा में इसकी गाय पर छोड़ दूंगा। 

बीरबल मन ही मन कहते है मुझे दो पागल और मिल गए। बीरबल उन दोनों को भी अपने साथ महल आने को कहते है। 

बीरबल उन ३ पागलो को अपने घर पर छोड़ जाते है और बाकि पागल की तलाश में निकल जाते है. 

रस्ते में उन्हें एक व्यक्ति कुछ ढूढ़ते हुए दीखता है. 

बीरबल - क्या में आपकी कुछ मदद कर सकता हु.

व्यक्ति - क्या तुम मेरी मदद करोगे। मेरी अंघूटी उस पेड़ के निचे गिर गयी है। परन्तु वहा पर ज्यादा अँधेरा है।  इसलिए में इसे यह उजाले में ढूढ़ रहा हु. 

बीरबल मन ही मन , मिल गया मुझे चौथा पागल। 

अगले दिन दरबार में। 

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अकबर- बीरबल क्या तुमने पागलो को ढूंढ निकाला। 

बीरबल- जी है , जहाँपना 

अकबर - क्या , मेरे शहर में इतने सारे पागल है। 

बीरबल- नहीं जहाँपना , किस्मत से मुझे सारे पागल एक ही दिन में मिल गए। 

बीरबल अकबर को सारे पागल उन्हें किस तरहा मिले उसकी कहानी सुनाते है। 

अकबर - तुम्हे सिर्फ ४ ही पागल मिले।  बाकि २ कहाँ पर हे। 

बीरबल - जी , सबसे बड़ा पागल में हु। क्योकि इन पागलो को ढूढ़ने का पागलपन में कर रहा था। 

अकबर - हमे दूसरे बड़े पागल का नाम सुनने से डर  लग  है ,बीरबल। 

बीरबल - जी सही सोचा अपने , सबसे बड़े पागल है आप। जो पागल को देखने की इच्छा हो रही थी आपको। 


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बुधवार, 30 दिसंबर 2020

Hindi kahaniya- Birbal ki khichdi

birbal ki khichdi

बीरबल की खिचड़ी -

एक बार शहंशाह अकबर अपने बगीचे में भ्रमण कर रहे थे। भ्रमण करते हुए वह अपने सलाहकार से कहते है। इस वर्ष बहुत ज़्यदा ठण्ड पड़ रही है। तब सलाहकार कहते है सही कहाँ जहाँपना , ठण्ड में लोग बहुत काम घर से बहार निकलते है. अकबर कहते है , काम तो फिर भी उन्हें करना ही होगा. अकबर फिर नदी किनारे बैठ जाते है। जैसे ही वह पानी में हाथ डालते है. तब उनको बहुत जयदा ठंडा पानी महसूस होता है। 

अकबर फिर कहते है ,आप सही कह रहे  है मान्यवर , ऐसी सर्दी में कौन बहार निकलेगा। बीरबल बोलते है, में आप से सहमत नहीं हु हज़ूर। अकबर आप हमारे खिलाफ जा रहे है. बीरबल कहते है नहीं जनाब, इस संसार में ऐसे भी लोग मौजूद है , जो पैसो के लिए कुछ भी कर सकते है. अकबर कहते है में आपसे सहमत नहीं हूँ। में नहीं मानता , कोई भी व्यक्ति थोड़े से पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाएं।

बीरबल कहते है, जहाँपना आपके नगर में ऐसे भी व्यक्ति है जो थोड़े से पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते है. अकबर कहते है , इस बात को साबित करके दिखाओ. अकबर कहते है , क्या तुम ऐसे आदमी को ला सकते हो जो इस पानी में पूरी रात बिता सके। में उस व्यक्ति को ५ सोने की मुद्रा दूंगा. बीरबल कहते है , हज़ूर इतने काम स्वर्ण मुद्रा के लिए भी कोई ना कोई मिल जयगा. 

बीरबल कहते है , जहाँपना में आज ही ऐसे व्यक्ति को ले आऊंगा. अकबर कहते है , ठीक है आप यह चुनौती पूरी कर के दिखाये। शाम में दरबार लगता है , बीरबल कहते है ,जहाँपना मुझे चुनौती स्वीकार करने वाला व्यक्ति मिल गया है। अकबर कहते है , उन्हें जल्द बुलाये हम उनसे से मिलना चाहते है. तभी दरबार में मोनू राम नाम के व्यक्ति को लाया जाता है , अकबर कहते है तुम्हे क्या करना है पता है ना तुम्हे. मोनू कहता है हां जहाँपना हमे पता है. अकबर कहते है इस व्यक्ति की निगरानी में २ सैनिक लगाए जाये। 

इसका अच्छे से ध्यान रखा जाये ,क्या पता उस ठंडे पानी में रहने से ये रात इसकी आखरी रात हो. अगली सुबह अकबर पूछते है , वह व्यक्ति कहाँ पर है. तभी उस व्यक्ति को दरबार में पेश किया जाता है. अकबर पूछते है कैसी गयी रात तुम्हारी. मोनू जवाब देता है , काट गयी जैसे तैसे , अकबर कहते मुझे यकीन नहीं होता है. मोनू कहता है अपने सैनिक से पूछ ले में पूरी रात पानी में था. अकबर कहते है ,मुझे यकीन नहीं होता, क्या किया तुमने सारी रात।

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मोनू जवाब देता है , हज़ूर शुरू में तो मुश्किल था ,परन्तु फिर मुझे दूर एक घर में एक लो दिखयी दी। उस लो को आग मान कर मैने पूरी रात निकाल दी. अकबर कहते है अच्छा उस दिए से गर्मी ले कर तुमने पूरी रात निकली है , अकबर कहते है तुमने हमारे साथ धोखा किया है। अकबर ,मोनू को जेल भिजवा देते है. बीरबल इस बात से काफी दुखी होते है और वह घर चले जाते है. 

२ दिन हो जाते है परन्तु बीरबल दरबार नहीं आते है , अकबर एक सैनिक को बीरबल को बोलने को भेजते है. सैनिक वापिस आ कर कहते है बीरबल कह रहे है वो खाना बना रहे है खाना बनते ही आ जायँगे। अकबर कहते है हम खुद उनके घर जायँगे ,वहाँ पर जा कर अकबर पाते है ,बीरबल एक ५० फ़ीट ऊपर टंगी हाडी में खिचड़ी पका रहे है , अकबर कहते है बीरबल इतनी ऊंचाई  रखी हांड़ी में खिचड़ी कैसे पक सकती है। बीरबल उतर देते है ,जैसे मोनू को काफी दूर रखे दिए से गर्मी मिल रही थी उसी तरह। 

अकबर अपनी गलती मान लेते है. और मोनू को रही व इनाम देते है.अकबर फिर बीरबल की होशियारी की प्रसंसा करते है।   

दोस्तों आप सभी को हिंदी कहानियां की तरफ से हैप्पी हरियाली तीज की मुबारक. सलमान कैसे तीज मानते है वो भी देख लेना 

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रविवार, 27 दिसंबर 2020

dudh ki kahani || akbar birbal ki kahaniya

dudh ki kahani akbar birbal ki kahaniya

दूध की कहानी -

अकबर अपने दरबार में बैठे हुआ थे। सभी सभागन उनकी बाते ध्यान से सुन रही थी। अकबर बोलते बोलते कहते है। हम यह मानते है बीरबल हम सभी में सबसे ज़्यदा होशियार है. सभा के अंदर कुछ लोग उनसे सहमत थे व कुछ नहीं। इन्ही सभी में से एक थे दीनानाथ। 

अकबर उन्हें पुकार कर कहते है दीनानाथ जी क्या आप हमारी बात से सहमत नहीं है. दीनानाथ जी कहते है हज़ूर मैने बस बीरबल  के किस्से सुनने है, परन्तु प्रत्यक्ष रूप से उनकी होश्यारी नहीं देखि. 

अकबर पूछते है बीरबल के किस्से पुरे भारत प्रदेश में प्रचलित है।  आपको उनकी चालक बुद्धि पर यकीन नहीं है. दीनानाथ इसका जवाब नहीं दे पाए। फिर शहंशाह अकबर कहते है अगर आपको यकीन नहीं है तो बीरबल के सामने कोई भी चुनौती रख दे हमे यकीन है वो उस चुनौती में सफल होँगे. 

दीनानाथ कहते है हज़ूर अगर बीरबल इतने जयदा बुद्धि वाले है तो वह हमारे सामने सांड का दूध ला कर रख दे. में मान जाऊंगा वह सबसे जयदा बुद्धि वाले है. 


पुरे राजदरबार में हलचल मच जाती है। अकबर भी कहते है यह कैसी चुनौती दी है तुमने ,यह अस्मभ है पूरा करना। दीनानाथ कहते है हज़ूर आप ही कहते है बीरबल जितना तेजज  कोई नहीं। 

अकबर कहते है बीरबल यह चुनौती स्वीकार है तुम्हे। बीरबल कहते है ,हज़ूर आपकी अगर यही इच्छा है तो यह इच्छा पूरी होगी आपकी। अकबर कहते है ठीक है बीरबल आप इस गुत्थी को जल्द सुलझये। ऐसा कह कर अकबर दरबार से चले जाते है। 

रात में अकबर जब सो रहे होते है तब उन्हें कुछ अजीबो गरीब आवाज सुनाई देती है। अकबर एक सिपाहई को बोलते है उससे कहते है इस आवाज को बंद करवाओ। 

ऐसा कह कर वो फिर सो जाते है। थोड़ी देर बाद फिर से आवाज आने लगती है। अकबर अब गुस्से में उठते है और दरबान पे चिलाते हुए कहते है कौन है यह इसको पकड़ कर मेरे सामने लाओ। दरबान बहार जाते है और वह पर पाते है एक लड़की कपड़े धो रही होती है. दरबान उसे पकड़ते है और अकबर के सामने पेश कर देते है। 

अकबर कहते है लड़की तुम इतनी रात को यहां क्या कर रही हो , तुमने हमारी नींद खराब की है इस बात की एक सही वजह दो. लड़की उतर देती है ,हज़ूर मुझे माफ़ क्र दी जिए मने आपकी नींद खराब की.परन्तु मेरी माँ मायके गयी हुई है और पिताजी ने एक लड़के को जन्म दिया है इसलिए मुझे अभी कपड़े धोने पड़ रहे है. 

अकबर कहते है तुम्हारी माँ अगर मायके गयी है तो बच्चे को जन्म किसने दिया। लड़की उतर देती है मेरा पिताजी ने। अकबर गुस्से में कहते है तेरा दिमाग तो खराब नहीं हो गया है. एक आदमी बच्चे को जन्म कैसे दे सकता है। लड़की उतर देती है आपके राज्ये में तो कुछ भी हो सकता है। 

अपने सुना नहीं सांड भी दूध देने लग गए है तो मेरा पिता क्यों नहीं बच्चे को जन्म दे सकते. अकबर अपनी गलती समझ जाते है। कहते है बेटा जाओ और बीरबल से कहना हम अपनी गलती समझ गए है। अगले दिन अकबर दरबर में कल रात का किस्सा सुनते है और कहते है बीरबल जितना चतुर कोई नहीं है.

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बुधवार, 23 दिसंबर 2020

Akbar Birbal KI Kahani - Maut Se Wapsi

maut se wapisi

मौत से वापिसी -

कहानी शुरू होती है अकबर और महारानी की नोकझोक से ,महारानी अकबर से कहती है मेरा भाई मानसिंह बीरबल से ज़्यदा अक्लमंद है परन्तु अकबर इस बात से सहमत नहीं होते है वह कहते है बीरबल जितना तेज दिमाग किसी का नहीं हो सकता। 

महारानी कहती है मानसिंह एक मौका मिलगा तो वह साबित कर देगा वह तेज दिमाग का है। तब अकबर कहते है ठीक है हम दोनों को एक विदेश दौरे पर भेजंगे ,हमे पता है बीरबल की वजह से दोनों  सफल लौटगे। 

अगली सुबह अकबर , बीरबल और मानसिंह को ईरान में उनका साही पैगाम ले कर जाने को कहते है. बीरबल और मानसिंह ईरान के लिए निकल जाते है। ईरान में जा कर, दोनों वहाँ के सम्राट से मिलते है। सम्राट दोनों की बहुत प्रसंसा करते है। बीरबल सम्राट को शहंशाह अकबर की चिठ्ठी देते है। 

उस चिठ्ठी को पढ़ कर सम्राट चकर में पड़ जाते है। उस चिठ्ठी के अनुसार बीरबल और मानसिंह को मौत की सजा देने का प्रवधान था। 

सम्राट शहंशाह अकबर का आदेश नहीं टाल सकते थे इस लिए वो सिपाहीओं को आदेश देते है दोनों को बंधी बना लो कल सुबह इन्हे फांसी पे लटका दिया जायगा. 

बीरबल और मानसिंह इस पैगाम से अचंभित भी थे और हैरान भी , मानसिंह इस घटना से ज़्यदा ही डर गया था और वह सम्राट के आगे गिड़गिड़ने लग गया था। परन्तु बीरबल बिकुल भी नहीं घबराये और शांति से चुपचाप चले गए. 

कारगर के अंदर मानसिंह बीरबल से झगड़ने लगता है कहता है जब सम्राट सजा सुना रहे थे तुम एक शब्द भी नहीं बोले। बीरबल कहते है चिंता मत कीजिये हमे कुछ नहीं होगा। बीरबल कहते है शहंशाह ऐसा को किया में इस बात पर विचार कर रहा हु। 

मांनसिंघ कहते है हम कल मर जायँगे और तुम क्यों मरेंगे इस बात पर विचार कर रहे हो। बीरबल कहते है हम कल सुबह आज़ाद हो जायँगे में जैसा कहु बस वैसे ही करना तुम. 

अगले दिन , बीरबल फांसी वाली जगह पर पूछ कर बोलते है हज़ूर मुझे पहले फांसी प चढ़ना है। मानसिंह कहता है न न न , में चढूँगा पहले फांसी। फिर मानसिंह कहता है में अकबर का साला हु इस नाते में तुम से जयदा बड़ा हुआ इस लिए में फांसी चढूँगा पहले। 

सम्राट और सभी आसपास के लोग आचर्य में पड़ गए ,सम्राट कहते है तुम दोनों अजीब हो डर नहीं लगता फांसी पे चढ़ने से। बीरबल कहते है किस बात का डरना हज़ूर , अगर फांसी लगने  से इनाम मिलगा तो कोई डर नहीं है। 

सम्राट कहते है कैसा इनाम, बीरबल कहते है हमारे बहुत बड़े ज्ञानी पंडित ने एक भविस्येवानी की थी। आज के दिन जिसको पहले फांसी लगेगी वो इन्दर लोक का राजा बनेगा। और जो दूसरे नंबर पे चढ़गा वो मंत्री बनेगा। 

इस बात को सुनकर सम्राट के मन्न में लालच आ जाता है वो कहते है तुम दोनों आज़ाद हो वापिस अपने वतन लोट जाओ। जब बीरबल और मानसिंह वापिस चले जाते है सम्राट खुद अपने आप को फांसी पे लटकवा लेते है। 

यहाँ पर बीरबल और मानसिंह वापिस अकबर के दरबार में आ जाते है। अकबर पूछते है हम यह जाने के लिए बेताब है आप लोग कैसे मौत से बच कर वापिस आ गए।  मानसिंह उतर देते है बीरबल के दिमाग की वजह से आज हम दोनों जिन्दा है और वह पूरा किस्सा सुना देते है। तब अकबर रानी को कहते है  रानी अब आप मान गयी ना बीरबल की होश्यारी।  

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रविवार, 20 दिसंबर 2020

Akbar Birbal Jadui Kua Ki Kahani

jadui kua ki kahani

जादुई कुआं की कहानी -

जादुई कुए की कहानी शुरू होती है शहंशाह अकबर के दरबार से , एक दिन शहंशाह अकबर अपने दरबार में बैठ कर महान गायक तानसेन जी के राग सुन रहे थे। उन्होंने पूरे दरबार में तानसेन जी बहुत प्रशंसा की परन्तु बीरबल जी ने कोई उत्तर नहीं दिया। शहंशाह अकबर कहते है बीरबल क्या आप मेरी बात से सहमत नहीं है। बीरबल जवाब देते है 

हज़ूर में मानता हु तानसेन जी बहुत अच्छे गायक है परन्तु उनसे भी बड़ा फनकार इस संसार में मौजूद है। इतने में अकबर एक पास के कुए में अपनी सोने की अंघूटी डाल देते है और कहते है बीरबल अब आपके पास दो काम है एक तानसेन से बड़ा फनकार ढूढ के लाओ और दूसरा मेरी अंघूटी कुए से बहार निकलो बिना इसमें उतरे. 

अगले दिन अकबर बीरबल से कहते है बीरबल कहाँ है तानसेन से बड़ा फनकार तब बीरबल उत्तर देते है,तानसेन के पिता तानसेन से भी अच्छा गाते है अकबर कहते है बीरबल उन्हें बुलाओ फिर, तानसेन जवाब देते है वो कभी घर से बहार नहीं निकलते इसलिए हमे ही वहाँ उनका संगीत सुनने जाना होगा। अकबर अगले दिन तानसेन के पिता का संगीत सुनने निकल जाते है। 

जब अकबर और उसके सभी मंत्री तानसेन के पिता की कुटिया के बहार पोहचते है। तानसेन कहते है जहाँपना हमे यही इंतज़ार करना होगा ,मेरे पिता किसी और के लिए नहीं गाते है उनका जब मन होता है वो गाते है। सभी वही पर बैठ कर तानसेन के पिता का इंतज़ार करने लगते है। तभी तानसेन के पिता बहार  आते है। और राग गाने लगते है। उनका राग सुनकर सभी मंत्र मुग्ध हो जाते है. 

अकबर तानसेन के पिता से बहुत प्रसन होते है वह उन्हें महल में ले जाने की जिद करते है परन्तु तानसेन के पिता कहते है में अपनी छोटी सी कुटिया में बहुत खुस हु हज़ूर ,में ईस्वर के लिया गाता हु आप बुरा मत मानयेगा। अकबर उनकी बात से सहमत हो जाते है और वह से चले जाते है।  तानसेन भी अपने पिता से आज्ञा ले कर चले जाते है। 

अकबर तानसेन जी पूछते है आपके पिता इतना अच्छा कैसे गा लेते है। बीरबल इसका उतर देते है हज़ूर तानसेन के पिता इस्वर भगती में लीन रहते है इसलिए इतने अच्छे से गाते है।  अकबर कहते है उस कुआं की अंघूटी का क्या हुआ बीरबल ,बीरबल उतर देतें है हज़ूर आज दोपहर तक अंघूटी मिल जायगी। 

निकला बीरबल  अकबर को ले कर उस कुआं में जाते है अंघूटी कुआँ के ऊपर एक मिटटी के दहले में तैर रही थी। बीरबल उसमे से अंघूटी निकलते है और अकबर को दे देते है अकबर पूछते है यह कैसे किया तुमने। बीरबल बताते है हज़ूर मने एक गिल्ली मीठी का दहला इस अंघूटी पर डाल दिया कुछ दिनों बाद यह दहला सुख गया और बारिश की वजह से ऊपर आ गया।  तब अकबर कहते है वह बीरबल यह कुए तो जादुई कुआँ निकला। 

दोस्तों आपको जादुई कुआँ की कहानी कैसी लगी।  अगर आपको मेरी यह कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट कर के बातये। दोस्तों जादुई कुए एक नैतिक शिक्षा की कहानी है जो अकबर बीरबल के सम्बन्ध को दर्शाती है। 
दोस्तों  अगर आपको Bollywood में दिलचस्पी है तो मेरे बॉलीवुड के पेज पर जाये और हेल्थ के लिए health tips के पेज पर 

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गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

Akbar birbal ki kahaniya - teli aur kasai ka kissa

Teli aur kasai ki kahani

तेली और कसाई कौन सच्चा ,कौन झूठा -

एक बार एक तेली और कसाई राजा बीरबल के घर पर पूछते है। वहाँ पर बीरबल का सेवक उनसे पूछता है आप लोग कौन है और यहाँ पर क्या कर रहे है।

 तभी तैली बोलता है मेरा नाम गंगू है और में यहाँ पर राजा बीरबल से इंसाफ मांगने आया हूँ। सेवक कहता है आप राजदरबार में आये वहां पर राजा बीरबल जी आपको मिलेंगे। परन्तु तैली अभी इंसाफ की जिद करने लगता है।

सेवक राजा बीरबल के पास जाते है और उन्हें सारा किस्सा सुनते है। बीरबल कहते है उन्हें अंदर ले आओ। सेवक दोनों को अंदर ले आता है। बीरबल उनसे पूरी कहानी सुनने को कहते है। तभी उसी समय दरवाजे पर शहंशाह अकबर आ जाते है। 

अकबर बीरबल से पूछते है यह दोनों कौन है। बीरबल जवाब में उत्तर देता है हज़ूर में इनसे यही जानने की कोशिश कर रहा था यह लोग कौन   है. 

बीरबल फिर पूछते है बताओ आप लोग अपनी कहानी। फिर तैली कहता है ,हज़ूर मेरा नाम गंगू तेली है में तेल का व्यापार करता हूँ। आज मेरा व्यापार अच्छा हुआ में अपने घर के लिए जा रहा था तभी रास्ते में इस बामन कसाई ने मुझे बुलाया  और तेल माँगने लगा। 

मैने इसको तेल दिया और मैंने जब इससे पैसे मांगे तो इसने मुझे एक चांदी का सिक्का पकड़ा दिया। और बदले में खुले रुपया माँगे। मेरा पास अधिक मात्रा में धन था तो इसकी नियत डीग गयी इसने मुझे आराम करने का प्रलोभन दिया। में अपने पैसे रख कर अंदर चला गया वापिस आया तो मेरे पैसे को यह अपने पैसे बताने लग गया। इस लिए हम यह आये है।

बीरबल अब कसाई से पूरी कहानी सुनाने को कहते है कसाई कहता है जनाब यह तेली सुबह मेरा पास आया था कह रहा जनाब मेरी सुबह से बोनी नहीं हुई है आप एक नाप तेल ले ले। मैंने इसपर दया करके १ नाप तेल ले लिया। फिर यह कहने क्या में हाथ मुँह धो सकता हु। 

मने इसको मना नहीं किया जब में अंदर से वापिस आ रहा था तो यह मेरी पैसे की पोटली चुरा रहा था।

अकबर, बीरबल से कहते है बीरबल इस समस्या का तुम हल कैसे निकालोगे। नहीं कोई गवाह है ना ही कोई सबूत। बीरबल उतर देते है जनाब एक गवाह है। अकबर पूछते है कौन ,बीरबल कहते है वो पैसो का थैला। अकबर कहते है यह कैसे संभव है। बीरबल कहते है हज़ूर होगा आप बस देखते जाये।

बीरबल  अपने सेवक से कहते है एक कटोरी में पानी भर कर लाओ। बीरबल उस पानी सी भरी कटोरी में सारे सिक्के डाल देते है। सिक्को पर तेल लगा होने की वजह से पानी के ऊपर एक तेल की परत आ जाती है.बीरबल कहते है यह पोटली तेली की है। अकबर बीरबल को शाबाशी देता है और कहानी यही समापत हो जाती है।

दोस्तों आपको कसाई और तेली की कहानी कैसी लगी। यह अकबर बीरबल सीरीज़ की सबसे सस्पेंस वाली कहानी है। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट कर के बातये। दोस्तों अगर आपको bollywood story के और health tips के बारे में पढ़ना है तो होम पेज पर जा कर पढ़ सकते है. 

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मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

Akbar Birbal Ki kahaniya/ Jungle Safari

akbar birbal ki kahaniya

अकबर बीरबल की कहानियां 

एक बार कुछ लोग जंगल काट रहे थे उन्हें  एक कबूतर और उसका बच्चा देख रहा था। कबूतर का बच्चा अपनी माँ से कहता है। माँ यह लोग कौन है और जंगल क्यों काट रहे है. माँ उत्तर देती है ,बेटा यह बादशाह के सिपाही है उनके लिए जंगल में रास्ता बना रहे है.

 फिर कबूतर का बच्चा पूछता है। क्या शहंशाह जंगल में जानवरो से मिलने आ रहे है। माँ उतर देती है नहीं,मिलने के लिए नहीं बल्कि उन्हें मरने के लिए।

बच्चा कहता है ,मारने के लिए क्यों। माँ उतर देती है ऐसे ही मस्ती के लिए. बच्चा कहता है यह कैसी मस्ती है यह लोग जानवर जैसा सलूक क्यों करते है. माँ कहती है वो खतरनाक है उन्होंने बहुत सारे जंगल काटे है। मासूम जानवरो को मारा है।

और आज वो फिर आ गए है। बच्चा कहता है माँ हमे सभी को जा के सावधान कर देना चाहिए. फिर दोनों सभी जंगल के प्राणिओ को शहंशाह के आने की खबर देने जाते है।

फिर कबूतर चिलाती है सावधान। शिकारी आ रहे है भाग जाओ सभी अपनी जान बचाओ। कबतूर की चेतावनी सुनकर एक खरगोश दूसरे खरगोश से कहता है। वो हमे को मारने आते है हमने उन्हें कभी नुकसान नहीं पोहचाया।

दूसरा खरगोश कहते है तुम सही कह रहे हो परन्तु अभी सभी अपनी जान बचाओ. अकबर अपने सिपाहीओं के साथ जंगल के अंदर चले आ रहा था।

अकबर बोलता है। आश्चर्य की बात है हमे अभी तक कोई जानवर नहीं दिखयी दिया। एक मंत्री कहता है लगता है सभी जंगल के अंदर चले गए है मालिक। 

अकबर कहते है क्या मतलब है तुम्हारा। बीरबल बोलते है शहंशाह हमारे सिपाहीओं ने बहुत सारे पेड़ काट दिए है ताकि आप आसानी से शिकार कर पाए इसलिए यहां से सभी जानवर  चले गए है क्योकि जानवरो को घना जंगल पसंद है हज़ूर।

 अकबर कहते है हम उन्हें ढूढ़ ही डालेंगे चाहे हमे जंगल में कहि भी जाना पड़े। फिर अकबर अपनी सेना के साथ जंगल के अंदर जाने लगते है। इतने में अकबर और उसकी सेना को बाघ की आवाज सुनाई देती है। सभी उस तरफ जाने लगते है।

 वह दूसरी तरफ कबूतर और उसका बच्चा भी बाघ के पास पहुंच जाता है। कबूतर उन्हें शिकारी के बारे में बताता है। बाघ वहां से भाग जाते है।

 अकबर बोलते है हमने कोई आवाज भी नहीं की फिर भी बाघ को भाग गए। मंत्री बोलता है हज़ूर शायद कोई उन्हें सतर्क कर रहा है। अकबर बोलते है कौन उन्हें सतर्क कर रहा है। मंत्री कहते है कबूतर , मैने दो कबूतर देखे थे। 

फिर मंत्री अकबर से कहते है आप परेशान ना होए मेरा हज़ूर में उन्हें कैद कर लूंगा। फिर अकबर और उनके सैनिक वापिस जाने लगते है।

 उन्हें वापिस जाते देख कबूतर निश्चिंत हो जाते है इतने में एक मंत्री उन्हें कैद कर लेता है। वह उन दोनों को अकबर के पास ला जाता है और कहता है इन् दोनों की वजह से आप शिकार से वंचित रहा गए। दोनों कबूतर जोर जोर से आवाज करने लगते है। 

 अकबर पूछते है यह दोनों इतने जोर से क्यों चिल्ला रहे है। बीरबल कहते है यह हमारी जान के लिए गिड़गिड़ा रहे है यह कह रहे है शहंशाह के राज्य  का अंत होने वाला है।

 बीरबल कहते है इनकी आवाज ध्यान से सुने यह कह रहे है अगर आप इसी तरह जंगल काटते रहेंगे तो बहुत जल्द वातावरण का विनाश हो जायगा और सभी मनुष्ये मारे जायँगे।

अगर पेड़ इसी रफ़्तार से काटे गए तो जानवर के पास रहने को जगह नहीं बचेगी और वह शहर की तरफ आयंगे। हज़ूर अब आपकी मर्ज़ी है या मोज़ के लिए शिकार करे या राज्य की सुरक्षा देखे

 अकबर बीरबल से कहते है तुम चालक ही नहीं बल्कि गहरी सोच रखने वाले हो।  आज से हम कभी भी शिकार नहीं खेलेंगे और अपने जंगल को भी हरा भरा करंगे। ऐसा कह के वो दोनों कबूतर को छोड़ देता है।

दोस्तों आपको यह कहानी कैसी लगी। ऐसी और कहानी के लिए इसी पेज पर आते रहे। अगर आपको योग सीखना है तो natural health tips और बॉलीवुड की कहानिओ के लिए बॉलीवुड स्टोरी पर विजिट करे।

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गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

Akbar Birbal ki Kahani in Hindi

akbar birbal ki kahani in hindi

अकबर बीरबल की कहानी -जादुई छड़ी 

दोस्तों आज में आपको अकबर बीरबल का एक दिलचस्प किस्सा सुनने वाला हूँ। इस किस्से का नाम है जादुई छड़ी। दोस्तों यह किस्सा अकबर बीरबल के किस्से में सबसे ज़्यदा प्रसिद्ध व रोचक माना जाता है।

कहानी शुरू होती है  एक साहूकार से उसका नाम था हीरा मल। हीरा मल एक ईमानदार और धनवान व्यक्ति है। एक रात वो अपना सारा धन एक बक्शे में रख कर उसकी चाबी अपनी तकिये के नीचे रख सो गया।

उसी रात एक परछाई आती है और उसका सारा धन चुरा कर ले जाती है। सुबह जब साहूकार उठता है तो उसको संदूक की टूटी हुई चाबी दिखयी देती है वह तुरंत संदूक की जाँच करता है और पता चलता  है उसका सारा धन चोरी हो गया है।  

वह तुरंत अपने द्वारपाल को बुलता है और पूछता है रात में कोई अनजान व्यक्ति आया था। द्वारपाल जवाब देता है

कोई नहीं आया था हज़ूर

व्यापारी कहता है में लूट गया अब में क्या करूंगा।

द्वारपाल कहता है हज़ूर आप अकबर के दरबार में जा कर इसका इंसाफ मांगे कुछ न कुछ हो जयगा.

अगले दिन व्यापारी अकबर के दरबार में जा कर सारी कहानी सुनता है।

अकबर बीरबल से कहता है बीरबल इस केस का हल तुम निकलो।

बीरबल जवाब देता है हज़ूर आधे घंटे के बाद व्यापारी के सभी नौकरो को यहां पर बुल्ये।

आधे घंटे बाद सभी नौकर राजदबार में एकत्रित हो जाते है।

बीरबल कहते है में तुम सभी को 1 ,1 जादुई छड़ी दूंगा। जो भी गुनहगार होगा उसकी छड़ी २ इंच तक बढ़ जायगी।

अकबर कहते है बीरबल क्या सच्ची में यह छड़ी जादुई है।

बीरबल उत्तर देता है हां ज़नाब यह जादुई छड़ी है मै इनका उपयोग विसेस अवसरों पर करता हु।

अगली सुबह सभी नौकर राजसभा में एकत्रित हो जाते है। बीरबल सभी से छड़ी लेना सुरु करते है। सभी से छड़ी लेने  के बाद बीरबल कहते है।

हज़ूर यह दवारपाल है चोर।

बीरबल फिर समझते है हज़ूर यह कोई जादुई छड़ी नहीं है मैंने यह इन्हे इसलिए दी थी मुझे पता था जो भी गुनहगार होगा वो छड़ी को छोटा कर देगा।

द्वारपाल अपनी गलती मान लेता है कहता है हज़ूर मुझे लगा कहि छड़ी बड़ी न हो जाये इसलिए मैंने इसको १ इंच कम कर दिया।

फिर द्वारपाल कहता है हज़ूर मुझे रुपैये की बहुत जयदा जरूरत थी इसलिए मैंने चोरी की ,मैंने एक भी रुपए खर्च नहीं किये में इन्हे वापिस लोटा दूंगा।

व्यापारी अकबर का सुक्रिया अदा करता है ,

अकबर कहते है मेरा नहीं बीरबल का शुक्रिया अदा करे। उन्होने इस केस को हल किया है।

फिर पूरा दरबार में बीरबल की जये जये कार होती है।

दोस्तों आपको अकबर बीरबल की यह कहानी कैसी लगी। दोस्तों इस कहानी से हमे बहुत कुछ सिखने को मिलता है।  बीरबल कितने चतुर थे व बिना साबुत होते हुआ भी उन्होंने कैसे चोर को पकड़ लिया। दोस्तों इसके अल्वा अगर आप चुड़ैल की कहानीशैतानी गुड़िया की कहानी पढ़ना चाहते है तो मैन पेज पर जा कर पढ़ सकते है

इसके अल्वा अगर आप हेल्थ टिप्स और बॉलीवुड स्टोरी के लिए नेचुरल हेल्थ टिप्स और बॉलीवुड स्टोरी पर विजिट करे.

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मंगलवार, 8 दिसंबर 2020

Akbar Birbal ki Kahani

akbar birbal ki kahani

अकबर बीरबल की कहानी - ईमानदार व्यापारी 

आपका अभिवादन मेरा राजा।

हाँ आप कौन हैं और क्या समस्या है।

महामहिम मेरा नाम गोपाल चंद है मैं बाज़ार में मक्खन बनाता हूँ और बेचता हूँ। लगभग एक महीने पहले मैंने चंदू को कुछ पैसे उधार दिए थे और अब न केवल उसने उसे वापस देने से इंकार कर दिया है  बल्कि यह और कह रहा है मेने कभी पैसे उधर ही नहीं लिए.

 अकबर बीरबल को बुला के कहता है बीरबल इस मामले को देखो।

बीरबल गोपाल चंद से कहता है

गोपाल  चाँद तुम मुझे पूरी कहानी बताओ।

गोपाल चाँद कहता है। महामहिम करीब एक महीने पहले चंदू  मल मेरा घर आया था उसने कहा गोपाल चंद मुझे एक नया व्यवसाय करना है उसके लिए मुझे कुछ पैसे उधर चाहिए। गोपाल चंद कहता है तुम मेरा मित्र हो म तुम्हे १०० सोने की मुद्रा उधार देता हु एक महीने बाद मुझे लोटा देना।

गोपाल चंद बताता है एक महीने बाद जब में चंदू मल के पास पैसे वापिस लेने गया तो चंदू मल ने उसे पैसे ही नहीं बल्कि उसने उसको कभी पैसे भी दिए थे ऐसा मानने से इंकार कर दिया।

बीरबल अब चंदू मल से कहता है तुम मुझे पूरी कहानी बताओ

चंदू मल कहता है राजा जी करीब १ महीने पहले गोपाल चंद मेरी दुकान पे आया था वह पर आकर मेरा हाल चाल पूछा और चला गया।

कल अचानक मेरी दुकान पे आके कहता है मैंने तुम्हे १ महीने पहले जो सोने की मुद्रा दी थी मुझे वापिस लोटा दो.

अकबर बीरबल से कहते है बीरबल इस समस्या को तुम सुलझाओ.

बीरबल अपने कक्ष में बेथ कर इस समस्या के बारे में सोच रहे होते है अचानक उनको एक तरकीब सूझती है। वो अपने सेवक को बुलाते है और कहते है। तुम एक काम करो बाजार में जाओ दोनों व्यापारी गोपाल और चंदू की सारी जानकारी निकल के लाओ।

कुछ समय बाद सेवक वापिस आता है और बताता है

बीरबल जी गोपाल चंद बहुत ही ईमानदार किस्म के आदमी है परन्तु वो चंदू मल बहुत ही धृत किस्म का आदमी बतया गया है.

बीरबल अब इस बात को परखने के लिए एक तरकीब बनते है वह २ हांड़ी लेता है और दोनों हांड़ी में एक एक सोना का सिक्का दाल देता है और अपने सेवक से कहते है जो तुम्हे सिक्का वापिस लोटय उसका नाम मुझे बतना।

अगले दिन दरबार में अकबर बीरबल से पूछते है बीरबल इन् दोनों मेसे कौन है अपराधी।

बीरबल बोलते है चंदू मल

अकबर कहते है कैसे

बीरबल जवाब देता है कल मने अपने सेवक से कहा था जो तुम्हे सिक्का वापिस लौटए उसका नाम बतना। राजा जी गोपाल चंद ने वापिस लोट्या इसका मतलब वह बहुत ईमानदार है और चंदू मॉल बईमान।

चंदू मॉल अकबर से कहता है महाराज मुझ से गलती हो गयी मुझे माफ कर दो.

अकबर कहते है एक तुम बेईमानी करते हो ऊपर से माफ़ी मंगते हो. म तुम्हे एक सर्त पर माफ करूंगा तुम्हे १०० की बजये २०० सोने की मोहर गोपाल चंद को देनी होगी

और आगे से कभी बेईमानी नहीं करोगे।

चंदू मल  बात मन लेता है और कहानी यही सम्पात हो जाती है.

दोस्तों आपको यह अकबर बीरबल की कहानी कैसी लगी। और कहानी जैसे  सतानी गुड़िया की कहानी, चुड़ैल की कहानी और रसोया और वेटर की कहानी पढ़ने के लिए  ब्लॉग के मुख्य पेज पर विजिट करे.

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